Monday, May 7, 2012

Deshi Lund


मैं और मेरी प्यारी शिष्या तनवी


मेरा नाम अनुज है, मैं बंगलोर की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूँ।
 
यह बात तब की है जब मैं अपनी मास्टर डिग्री पूरी कर रहा था। पढाई में अच्छा था तो खाली समय में टयूशन पढ़ा लेता था। मुझे किसी के रेफेरेंस से एक टयूशन मिली। वो एक लड़की थी जिसका नाम तनवी था, वो स्नातिकी कर रही थी। जब पहली बार मैंने उसे देखा तो बस देखता ही रह गया। मन ही मन उस इंसान को शुक्रिया कहने लगा जिसने मुझे उससे मिलवाया था। जिसे आप सम्पूर्ण लड़की कह सको, बिल्कुल वैसी थी तनवी। जवानी पूरे जोर से छाई थी उस पर .. कातिलाना आँखें, भरे-भरे स्तन, करीब 28 इन्च की कमर और एकदम मक्खन जैसे होंठ.. और उसके कपड़े- उफ्फ्फ ! क्या कहूँ .. गहरी वक्ष-रेखा बहुत आराम से आपको निहारती थी..

खैर टयूशन शुरू हुई.. वो मेरे ही घर आती थी पढ़ने.. घर पर सब होते थे और सबको पता था कि वो पढ़ने आती है तो एक कमरा हम दोनों के लिए खाली रखा जाता था। फिर ऐसे ही चलता रहा, वो पढ़ने आती रही..

धीरे-धीरे हम दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। हम इधर-उधर की बातें भी करने लगे पढाई के साथ साथ। कभी कभी मैं उसके गालों को खींच देता जब वो कोई गलती करती पढ़ाई में..

कभी कभी हम दोनों के हाथ भी टकरा जाते कुछ समझाते हुए। उसने कभी कुछ भी नहीं कहा.. जब भी मैं उससे छू जाता तो पूरे शरीर में सिहरन दौड़ जाती थी.. उसके बारे में सोच-सोच कर कई बार मैंने रात को मुठ भी मारा था.. मन करता किसी दिन वो हाँ कर दे तो उसके साथ एक भरपूर सेक्स का मज़ा लूँ ! उसकी आँखों को देख कर लगता था कि वो सब समझती है।

एक बार की बात है मेरे घर वालों को बाहर जाना था। मैं नहीं गया, मेरा मन नहीं था जाने का।

तनवी हमेशा फोन करके आती थी। उस दिन भी उसका फोन आया पर यह बात मैंने तनवी को नहीं बताई कि घर पर कोई नहीं है।

वो आई, बोली- अंकल-आंटी सब कहाँ गए?

मैंने बोल दिया- बाज़ार गए है.. 

फिर हम पढ़ने बैठ गए हमेशा की तरह। लेकिन मैंने उससे कहा- आज सोफे पर बैठ कर पढ़ेंगे.. 

वो बोली- क्यों?

मैंने कहा- आज मेज़-कुर्सी पर बैठने का मन नहीं है..

तो उसने कहा- ठीक है..

फिर हम दोनों एक ही सोफे पर बैठ गए.. एक तरफ़ वो, दूसरी तरफ़ मैं ..

उस दिन पढ़ते हुए उसने कुछ गलती की तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- आज तुमको इस गलती की बड़ी सजा मिलेगी..

तो इस पर वो बोली- क्या?

यह सुनकर मैंने उससे एकदम से अपनी ओर खींच लिया..

वो एकदम से खुद को संभाल नहीं पाई और मेरे ऊपर आ कर गिरी, उसके स्तन मेरे सीने पर थे, लगा जैसे पूरे शरीर में बिजलियाँ दौड़ गई हों..

फिर हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे..

वो बोली- छोड़ो ना..

मैंने कहा- तनवी, कब से इस दिन का इंतज़ार किया है ! आज छोड़ने को मत कहो..

वो बोली- मतलब?

मैंने कहा- तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.. मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ..

वो बोली- मुझे पता है ! बस तुम्हारे मुँह से सुनना चाह रही थी..

यह कह कर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.. यह पहली बार तो नहीं था कि मैं किसी लड़की को चूम रहा था पर फिर भी इतने नर्म होंठ मैंने कभी चूमे नहीं थे..

वो अपने मुलायम होंठों से मेरे होंठों को चूसने लगी..

मैंने उससे बाहों में भर रखा था..

हम करीब 15 मिनट तक एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे, फिर वो बोली- छोड़ो ! कोई आ जाएगा .. 

तब मैंने उसे बताया- कोई नहीं आएगा ! सब शहर से बाहर गए हैं..

तो वो समझ गई कि मैंने उससे झूठ कहा था, बोलो- नौटी बॉय !

और कह कर फिर से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए..

इस बार पता नहीं मुझे क्या हुआ कि मैं उसे पागलों की तरह चूमने लगा .. उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा ..

उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी.. वो मुझसे कस कर चिपक गई.. मैं उसकी टी-शर्ट ऊपर करने लगा... और उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगा.. उसकी सिसकारियाँ बढ़ने लगी.. मैंने उसकी टी-शर्ट निकल दी.. उसकी काले रंग की ब्रा पहनी थी.. उसमें से उसके गोरे-गोरे स्तन बाहर निकल कर मुझे छूने को आमंत्रित कर रहे थे..

मैंने भी उनको जल्दी से उस ब्रा से आज़ाद कर दिया.. 

इतने भरे-पूरे मम्मे मैंने कभी नहीं देखे थे.. मैं उनको दबा-दबा कर चूसने लगा..

उसकी सिसकारियाँ सुन-सुन कर मेरा जोश बढ़ जाता और मै उनको ज्यादा जोर से दबा-दबा कर चूसने लगता..

इसी बीच मैंने उसका हाथ अपने लंड पर महसूस किया, मैंने देर न करते हुए अपनी टी-शर्ट और पैंट उतार दी.. अब मै सिर्फ जॉकी की चड्डी में उसके सामने था..

वो अपनी कैपरी उतारने लगी तो मैंने कहा- मुझे उतारने दो..

फिर मैंने उसकी कैपरी उतार दी..

अब हम दोनों सिर्फ चड्डी में थे एक दूसरे के सामने..

हम दोनों एक दूसरे से चिपक गए और प्रगाढ़ चुम्बन करने लगे..

वह अपना हाथ मेरी चड्डी में डाल कर मेरे लौंडे से खेलने लगी।

मेरे लौड़े का बुरा हाल हो रहा था .. इतना ज्यादा तन चुका था कि दर्द होने लगा लौड़े में..

अब मैंने उसको बोला- इसको प्यार करो ना..

तो उसने प्यार से मेरे लौड़े पर एक चुम्बन ले लिया..

मैंने बोला- ऐसे नहीं ! इसको मुँह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूसो, तब इसको अच्छा लगेगा..

पहले तो उसने मना किया लेकिन मेरे कहने पर मुँह में ले लिया फिर धीरे धीरे उसको मज़ा आने लगा और वो बुरी तरह मेरे लौड़े को चूसने लगी..

मेरी सिसकारियाँ निकलने लगी तो वो और भी ज्यादा जोर से चूसने लगी लौड़े को.. बोली- आज इस लॉलीपोप को मैं खा जाउंगी..

मैं हंस पड़ा..

फिर मैं उसकी चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा..वो गीली हो चुकी थी.. 

ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसकी चड्डी उतार दी तो देखा उसकी चूत पर बहुत ही हल्के हल्के बाल थे और गुलाबी सी चूत की दो फाकों को देख कर लग रहा था कि किसी ने अभी तक इन्हें छुआ भी नहीं होगा !

मैंने आव देखा ना ताव ! और उस पर मुँह रख दिया.. अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा .. 

तो वो पागल सी हो उठी.. बोली- चाटो आआआअ ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह और ज़ोर से आआ अह्ह्ह्हह्ह्ह चाटो...

मैं चाटता रहा, फिर वो झड गई...

मेरी हालत ख़राब हो रही थी, अभी मेरा नहीं निकला था.. मैंने उसको कहा- मैं तुम्हारी चूत में अपना लौड़ा डाल रहा हूँ !

तो वो बोली- नहीं यह मत करो प्लीज !तो मैं बोला- मेरा क्या होगा ? मेरा तो निकला भी नहीं अभी तक..

तो वो बोली- मैं कुछ करती हूँ..

यह कह कर वो मेरे लौड़े को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी और अपने हाथों से मेरा मुठ मारने लगी..

मैंने भी कई बार मुठ मारा था पर उसके कोमल कोमल होंठों और हाथों से मुठ मरवाने में अलग ही मज़ा आ रहा था..

मैं बोला- और जोर से चूसो ! और जोर से मुठ मारो..

तो उसने और जोर जोर से मेरा मुठ मारना शुरू कर दिया। करीब पाँच मिनट बाद मेरा माल निकल पड़ा.. वो सारा माल मैंने उसकी चूचियों पर गिरा दिया .. 

और वो हंसने लगी और बोली- यह क्या किया..?

मैं भी हँसने लगा..

फिर मैंने उसे बाहों में ले लिया और हम दोनों ज़मीन पर लेट गए और ऐसे ही पड़े रहे बहुत देर तक !

उसके बाद उसने कहा- अब मुझे जाना है..

मैंने कहा- पहले मुझे तुम्हारी चूचियाँ साफ़ करने दो..

फिर मैंने एक गीले कपड़े से उसके वक्ष को मल-मल कर साफ़ किया..

फिर उसने कपड़े पहने और मुझे चूमा..

फिर वो चली गई अगले दिन आने का बोलकर..

घर वाले तीन दिन बाद वापस आने वाले थे.. अभी २ दिन और थे दोस्तो ..

तो यह थी कहानी मेरी और मेरी शिष्या तनवी की..

अच्छे से करो ना !


प्रेषक : आयु राजा
दोस्तोमेरा नाम आयुष है प्यार से लोग मुझे आयु राजा कहते हैं। मेरी उम्र 28 साल हैशादीशुदा हूँघर में मैं और मेरी बीवी हम दोनों ही रहते हैंमेरा बिज़नेस है और मेरी बीवी हाउसवाइफ है।
बात तब की है जब मेरी बीवी मायके गई हुई थी।
रविवार थामैं सोया हुआ था कि अचानक दरवाज़े की घण्टी बजी। मैं तपाक से उठा और दरवाजा खोला तो देखा कि एक खूबसूरत औरत दरवाजे पर खड़ी है।
क्या मस्त फ़ीगर थी उसकी !
वो और कोई नही हमारी घरेलू नौकरानी थी।
कयामत लग रही थी साली !
मैंने उसे कहा- कम-इन !
वो अंदर आ गई।
उसका नाम था सोनाहम उसे सोनी कहते थे। उसको काम पर लगे हुए कुछ ही महीने हुए थेपर जब से वो काम पर लगी है उस दिन से ही मुझे स्माइल देती हैएक दिन तो उसने मुझे आँख भी मारी थी।
मैने उससे कहा था- यह क्या कर रही है?
तो वो सकपका कर बोली थी- आँख में कचरा चला गया था।
मेरे मन में भी उसे चोदने का ख्याल आता थाएक दम सॉलिड माल था।
एक बार वो सफाई कर रही थीअचानक उसका दुपट्टा नीचे सरक गयामेरे मुँह से वाओ निकल गया और शायद उसने सुन लिया और मुझे मुस्कुरा कर फ़िर से आँख मार दी।
उसके मम्मे कमाल के थेजी चाह रहा था कि उन्हें चूस चूस के निचोड़ दूँ !
पर हाय री मेरी मजबूरी ! मेरी बीवी ...
अब तो उसका रोज का काम था मेरे सामने झुक झुक कर अपने मम्मे दिखाना सफाई के बहाने !
मैं भी मौका देख कर उसे छेड़ देता था पर अफ़सोस कुछ कर नहीं पाता था।
शायद यही सोच कर खुश होता था कि समय बड़ा ही बलवान होता है।
खैर ! वापिस अपनी कहानी पर आते हैं !
जैसे ही वो अन्दर आईमैंने उसकी पीठ पर हाथ दे मारा..
आ..ओ..ह ! एक प्यारी सी आवाज आई।
वो बोली- यह क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- तुझे छेड़ रहा हूँ !
मैंने पूछा- आज जल्दी क्यों आ गई?
तो उसने बताया- आज कुछ काम से जाना है इसलिए जल्दी आ गई।
मैंने कहा- आज तुझे नहीं जाने दूँगा ! आज तेरी मालिकन घर पर नहीं है !
तो वो गुस्से में मुझे घूरने लगी।
मैंने कहा- क्या हुआ तुझेतेरा पारा एकदम क्यों चढ़ गया?
उसने कहा- आपके कहने का मतलब क्या हैक्या करोगे मेरे साथ?
अरे पगली ! मैं क्या करूँगा तेरे साथ मुझे तो अपने कमरे का पंखा साफ़ करवाना हैइसलिए बोला कि तुझे जल्दी नहीं जाने दूँगा। पर तू न जाने क्या समझ गई।
और मैंने उसे आँख मार दी।
वो शरमा कर लाल हो गई।
वो घर के काम निपटाने में लग गई और मैं अपने कमरे में बिस्तर पर लेट गया। वो कमरे में आईझाड़ू लगाने के लिए झुक-झुक कर मुझे रिझाने लगी।
मेरा लंड भी तन के खड़ा हो गया।
उसने भी देखा।
मैं बिस्तर पर उठ कर बैठ गया। जैसे ही वो बिस्तर के पास से सफाई करने लगीमैंने अपना हाथ उसकी गाण्ड पर रख दियाउसने झटके से मेरा हाथ हटा दिया।
वो अपना काम कर के जाने लगी तो मैंने उसको आवाज़ लगाई- सोनीरुक तो ज़रा ! अभी कुछ काम बाकी है !
वो बोली- यह आप क्या कह रहे हो?
मैं बोला- तू हमेशा ग़लत मतलब क्यूँ सोचती है?
मन में तो यही चल रहा था कि साली हमेशा सही सोचती है।
आपको क्या काम है मुझसे वो बोली।
मैने कहा- पंखा साफ करना है ! थोड़ी देर में हो जाएगाजल्दी से दोनों कर लेते हैंमेरी बीवी भी घर पर नहीं है।
मैं चुप हो गयावो मुझे घूरने लगी।
मैने कहा- वो आएगी तो खुश हो जाएगी कि मेरा पति मेरा कितना ध्यान रखता है।
वो मान गई और बोली- मुझे जाना भी है ! तो जल्दी कर लेंगे !
मैं बोला- बहुत बढिया ! तू जल्दी से स्टूल ले आ ! मैं बाकी की तैयारी कर के रखता हूँ।
वो गई और स्टूल ले आई।
मैंने कहा- चलजल्दी से चढ़ जा और शुरू हो जा !
वो हंस कर बोली किस पर ?
मैंने भी तपाक से जवाब दिया- फ़िलहाल तो स्टूल पर चढ़ जा !
और मैं भी हंसने लगा।
वो स्टूल पर चढ़ कर पंखा साफ करने लगीउसका दुपट्टा बार बार सरक रहा थामैने कहा- इसे मुझे दे दे !
उसने कहा- मुझे शरम आती है !
मैं हंस पड़ा !
उसने पूछा- आप हंस क्यूँ रहे हो?
मैने कहा- जब झुक-झुक कर दिखाती हैतब शरम नहीं आती क्या तुझे?
वो एकदम चुप हो गईअपना दुपट्टा मुझे दे दिया और पंखा साफ करने लगी।
स्टूल थोडा हिल रहा थाउसने कहा- मुझे पकड़ लोकहीं मैं गिर ना जाऊँ।
मैं उसके करीब गया और उसे पकड़ लिया। मानो उसको जोरदार करेंट का झटका लगा हो।
मैंने कहा- तू घबरा मत ! तू अपने काम में लगी रह और मैं अपने काम में !
मेरे हाथ उसकी कमर पर थेमैं धीरे-धीरे अपने हाथ थोड़ा नीचे ले आया तो अचानक वो बोली- आपको केवल यही काम करना है क्या?
मेरे मुंह से हाँ निकल गया।
मर गये बेटा ! मन में ख्याल आया।
वो बोली- तो अच्छे से करो ना !
मेरी तो जैसे किस्मत ही खुल गई। मैंने अपने हाथ उसकी गाण्ड पर घुमाना शुरू कर दिया और अपना मुंह उसके पेट से चिपका लिया।
उसे मानो एक बार फ़िर से झटका लगा और कहने लगी- मज़ा आ रहा है !
फ़िर क्या थामैं बेकाबू हो गया और उसे अपनी गोद में उठा कर बिस्तर पर ले आया और लेटा दिया और चूमने लगा।
वो आह आह सिसकारियाँ भरने लगी।
फ़िर मैंने उसकी सलवार और कुर्ता उतार दिया। वो काली ब्रा और पैंटी में कयामत लग रही थी।
मैं एक हाथ से उसके मम्मे दबाने लगा और एक हाथ से उसकी चूत मे उंगली करने लगा। उसकी चूत गीली हो गई थी।
पूरा कमरा उसकी सिसकारियों से गूँज रहा था। वो बोली- मेरे राजा ! जल्दी से मेरे ऊपर आ जा !
मैंने कहा- आता हूँ ! आता हू। ! अभी तुझे अपना जलवा दिखाता हूँ !
वो उठी और मेरे कपड़े उतारने लगी। जैसे ही उसने मेरा अंडरवीयर उतारामैंने उसके बाल कस कर पकड़ लिए और अपना लंड उसके मुँह में दे दिया।
उसने छी कहते हुए बाहर निकाल दिया। मैंने उसे समझाया पर वो ना मानी।
फ़िर क्या था मैं उसके ऊपर 69 अवस्था मे चढ़ गया और उसकी चूत चाटने लगा।
आआहह आहह आअहह ! मज़ा आ रहा है मेरे राजा ! वो बोली।
मैंने कहा- मेरा लंड मुँह में ले ले ! और भी ज्यादा मज़ा आएगा।
फ़िर क्या थाउसने मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीजैसे वो कोई लॉलीपोप चूस रही हो। वो उछल उछल कर अपनी चूत मेरे मुँह में दे रही थी कि अचानक उसने मेरा मुँह अपनी चूत में दबा दिया कस के।
वो झर रही थी और मैं उसकी चूत चाट रहा था।
वो झर चुकी थी और निढाल हो कर लेट गई। मैं सीधा हुआ और उसके मम्मे चूसने लगा।
उसने कहा- बहुत मज़ा आया मेरी जान ! अब मुझे जाने दो !
तुम्हें तो मज़ाआ गया पर मुझे तो लेने दो ना ! मैंने कहा।
उसने कस कर मुझे अपनी बाँहो में ले लिया और कहा- कर लो जितना चाहे कर लो ! जब चाहे कर लो ! कभी भी कर लो !
मैं फ़िर शुरू हो गया उसके मम्मे चूसने और मसलने !
"आराम से ! तुम्हारे ही हैं !" वो बोली।
मैंने झट से उसकी टाँगें फ़ैलाई और अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया और उसकी चूत सहलाने लगा।
वो फ़िर से गर्म होने लगी और अपनी चूत हिलाने लगी और कहने लगी- जल्दी से घुसाओ मेरे राजा !
जैसे ही मैने अपना लंड अंदर घुसायामुझे कुँवारी चूत का अनुभव हुआ।
मैंने पूछा- कभी पहले लिया नहीं है क्या ?
उसने बताया- नई-नई शादी हुई हैपति का छोटा है !
यह सुन कर मैं और मेरा लंड खुशी से फूला नहीं समा रहे थे और एक ही झटके में मैंने अपना 7' का लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
एक जोरदार चीख से पूरा कमरा गूँज उठा।
मैने अपना हाथ उसके मुँह पर रख कर अपना लंड हिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे उसे मज़ा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगी। मैं अपने हाथों से उसके मम्मे मसल रहा था और अपना लंड सोनी की चूत में पेल रहा था।
आहा ! आहा ! मार डाला ! मज़ा आ गया ! कहते कहते वो फ़िर से झर गई। मेरा काम जारी था कि मुझे लगा कि मैं भी झरने वाला हूँ तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और कहा- चूस !
वो पागलों की तरह मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके मुँह में झर गया।
सोनी ने मुझसे चुद कर संतुष्ट होकर कहा- साहबअपने मुझे वो सब दिया है जो आज तक मेरे पति ने नहीं दिया हैमैं इसका अहसान कैसे चुकाऊँगी?
मैंने भी तपाक से बोल दिया- तू मुझे रोज खुश कर दिया कर..
"चल हट..." कह कर वो भाग गई।
मैंने दरवाजा बंद किया और मैं नहाने चला गया...
इतने में फिर से घंटी बजीमैंने सोचा- वही साली होगी !
मैंने तौलिया लपेटा और चल पड़ा दरवाजा खोलने !
मेरा लण्ड उसको सोच सोच कर फिर से खड़ा हो गयातौलिये से लण्ड का उठान साफ झलक रहा था।
जैसे ही मैंने दरवाजा खोलाज़ोर का झटकायारो जोर से लगा !
काली स्कर्ट और बदन से चिपकी सफेद टी-शर्ट पहने हुए एक लड़की... उसके स्तन जैसे लग रहा था कि अभी टी-शर्ट फाड़ कर बाहर आ जाएँगे।
मीठी सी आवाज़ में उसने पूछा- कैसे हो राजा?
हाय ! दिल घायल सा हो गया ..
राजा ! राजा ! राजा ! उसकी मीठी मीठी आवाज़ कानों में गूँज रही थी..
"अंदर आओ..'
वो अंदर आ गईमुझे ऊपर से नीचे घूर रही थीउसकी नज़र मेरे लण्ड पर जा रही थी बार बार..
तभी मैंने भी मौके पे चौका मारा- कभी देखा नहीं है क्या?
"क्या?"
मैं बोला- कुछ नहीं..
आप लोग यह जानने के लिए बेताब होंगे कि वो कौन थी...
वो थी प्रिया कातिल हसीना’ हमारी पड़ोसन.. पटाकाचिकन तंदूरी !
मैंने कई बार उसको सपनों में ठोका हैवो मेरी बीवी की अच्छी सहेली है...
और मुझ से भी बात कर लेती है उसके साथ साथ...
"आप क्या कर रहे थे राजा जी?" उसने बड़े प्यार से पूछा।
मैंने कहा- मुझे इस हालत में देख कर तुमको क्या लगता है?
उसने आँखों से मेरे लण्ड की तरफ इशारा कर के बोला- इस हालत में !
और वो हँसने लगी !
मैं सकपका गया- अरे यारमैं नहाने जा रहा था कि तुम आ गई। खैरतुम बैठोमैं कपड़े पहन कर आता हूँ।
मैं अपने कमरे में गया और झट से शॉर्ट्स पहनने लगा कि अचानक मेरी नज़र आईने पर गईप्रिया मुझे झांक-झांक कर देख रही थी !
मेरे मन में तो लड्डू फ़ूटने लगे।
मैं बाहर आया और कहा- वैसे नरेश कहाँ है आजकलदिखाई नहीं दिया है दो तीन दिन से?
"नरेश आउट ऑफ स्टेशन गये हुए हैं।" वो बोली।
"ओह ! तो तुम भी मेरी तरह अकेलेपन का जीवन जी रही हो प्रिया?"
"हाँ..."
"वैसे एक बात पूछूँ तुमसेयह सोनी को क्या हुआवो भागे भागे क्यों जा रही थीकहीं तुमने कुछ..?"
"प्रियातू भी ना कुछ भी बोलती रहती है.. !"
"नहींअभी अभी तो तुम कह रहे थे कि तुम अकेलेपन के शिकार हो और 15 दिनों से बेरोज़गार हो..?"
"नरेश भी तो नहीं है 2-3 दिन से...कहीं तुम भी बेरोज़गार तो नहीं हो?" और मैं हंस पड़ा ज़ोर से।
वो बड़ी उदास होकर बोली,"आज दिन हो जाएँगे उसे !"
मैं सब समझ गया और कहा,"तुम उदास मत हो डार्लिंग ! मैं हूँ ना ! तुम क्या लेना पसंद करोगी प्रिया?" मैंने पूछा।
वो बोली,"तुम्हारे पास जो सबसे अच्छा हो वो दे दो..."
मैं जब तक कुछ ग़लत समझूँउसने तपाक से कहा,"तुम मुझे क्या दे सकते हो?"
मैंने कहा,"जो तुम बोलोचायकॉफीकोल्ड ड्रिंकबियरविस्कीवोड्का..!"
"उम्म्म्मममम"
"बियर पिओगी प्रियामज़ा आ जाएगा ज़िंदगी का..."
थोड़ी हिचकिचाहट के बाद बोली,"हाँ !"
मेरी तो निकल पड़ी...
प्रिया मैं तो रोज करता हूँआज तुम मेरे लिए करो...
वो गुस्से में बोली,"क्या मतलब है तुम्हारा?"
मैंने कहा- खातिरदारी यार ! वैसे तू क्या समझीबता तो सही?"
"चुप कर तू !" बड़े सेक्सी अंदाज में बोली वो।
सारी तैयारी हो गईअब जश्न बाकी था..
प्रिया फटाफट से खोल ! अब रहा नही जा रहा है।
क्या खोलूँ राजा?
मैंने कहा- फिलहाल तो सिर्फ़ बोतल खोलबाकी तो मैं संभाल लूँगा...
उसने बड़े ज़ोर से मुझे कोहनी मारी और कहा- बदमाश कहीं के !
उसने बीयर की बोतल खोलीएक ग्लास भरा और दूसरा ग्लास लेने के लिए बोतल अपने टाँगों के बीच में रखी..
मैंने कहा- यह बोतल की जगह नहीं है प्रिया डार्लिंग !
वो लाल हो गईगुस्से में नहींशर्म के मारे !
दोनों मज़े ले रहे थे कि दोनों के ग्लास खाली हो गये।
मैंने कहा- अब मैं डालूँगा तुम्हारे में...
मैं धीरे से उसकी कुर्सी के पीछे गया उसके पास रखी बोतल उठाई और बीयर ग्लास में डालने लगा।
प्रिया ने ग्लास अपने सीने से लगा रखा थामैंने जैसे ही बीयर डालना शुरू किया उसने ग्लास हिला दियाशायद जानबूझ कर !
बीयर उसके सीने पर गिरी।
सॉरी तो बोलना ही था मैंने ! चाहे यह उसने जानबूझ कर भी किया हो !
मैंने कहा- प्रियाप्रिया ! आई एम रियली वेरी सॉरी !
और मैंने जेब से रुमाल निकाला और उसकी शर्ट सॉफ करने लगा।
बीयर ठंडी थी जिसके कारण उसकी कड़क हो गई चूचियाँ शर्ट से साफ नज़र आ रही थी।
उसके मम्मे ओह मेरा मतलब शर्ट साफ करते करते उसके मम्मों को छेड़ दिया मैंने।
प्रिया बोली- यह क्या कर रहे हो...?
मैं भी अकड़ कर बोला- किया तो तूने सब ! नाम मेरा ले रही हैफिर भी सॉरी बोला ना तुझे?
"तू भी ना मेरी हर बात दिल पे ले लेता है राजा.. !"
मैं बोला- अभी ली कहाँ है तेरी…?
"तो फिर लो ना ! मैंने मना कब किया है तुझे?" कह कर वो खड़ी हो गई।
मैंने अपना ग्लास नीचे रखा और उसके पीछे जाकर चिपक गयाउसके हाथ से ग्लास लेकर नीचे रखावो इससे पहले कुछ बोलतीमैंने अपनी उंगली उसके होंठों पर रख दी और कहा- श्श
मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और मेरा लण्ड उसकी गाण्ड चूम रहा था।
धीरे धीरे उसकी कमर सहलाते हुए मेरे हाथ उसकी गाण्ड पर पहुँच गए थे।
क्या गाण्ड थी उसकी ! माँ कसम छूने से इतना मज़ा आया तो चोद कर कितना आएगा ?
मन में लड्डू फ़ूटने लगे मेरे !
इतने में एक प्यारी सी आवाज़ आई- आहह !
मैंने धीरे से उसके कान में कहा- नाइस एस !
और उसके कान चूसने लगा।
वो इतना जल्दी गर्म हो जाएगीमैंने सोचा ही नहीं था।
मैंने धीरे धीरे उसकी स्कर्ट ऊपर करके पैंटी नीचे सरका दी और उसकी गीली चूत में उंगली करने लगा।
उसने मेरे हाथ पकड़े और अपने मम्मों पर रख दिएकहने लगी,"अच्छे से करो ना ?"
फिर क्या थाहरी झंडी मिलते साथ ही मैंने उसको गोद में उठा लिया और अपने बेडरूम में ले गयाउसे पलंग के किनारे पर बिठा दियामैं नीचे झुका और उसकी चूत में घुस गया।
काली स्कर्ट में गुलाबी चूतवो भी एकदम चिकनी ! भेनचोद कयामत थी !
उसकी चूत की भीनी-भीनी खुशबू मुझे पागल किए जा रही थीचूत चाटने का इतना मज़ा मुझे पहले कभी नहीं आया थामेरी ज़ुबान उसकी चूत में थी और वो आ आहहा एयेए इसस्स सिसकारियाँ भरे जा रही थी।
वो झड़ चुकी थी।
मैंने उसे खड़ा किया और उसकी टी-शर्ट और काली ब्रा भी उतार दी।
प्रिया एकदम नंगी थी मेरे सामने ! चिकनी चूत और मखमली मम्मे ! जी कर रहा था कि खा जाऊँ भेनचोद को ! फिर उसने मेरी टी-शर्ट उतारी और तम्बू बनी मेरी शॉर्ट्स के ऊपर से मेरे लण्ड से खेलने लगी।
मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने शॉर्ट्स में डाल दिया। मैंने अंडरवियर नहीं पहना हुआ थामेरा लण्ड पकड़ कर वो लाल हो गई।
मैंने फिर उसे कहा- चूस इसे !
उसने छी कहते हुए मना कर दिया।
मैं उससे बोला- चूत चटवाने में तो बड़ा ही मज़ा आ रहा थाउस वक़्त छी कहाँ गया था तेरानरेश का कभी चूसा नहीं है क्या तूने?
"नहीं ! उसने कभी कहा ही नहीं मुझे !"
मैंने कहा- और तेरी चूत?
वो बोली- फटाफट पेल कर सो जाता है।
चल अब जल्दी से चूस मेरा ! फिर तुझे जन्नत की सैर करवाता हूँ !" कह कर मैंने अपनी निक्कर उतार दी।
"अरेबाप रे !"
मैंने उसका सिर पकड़ा और अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया और कहा- चूस मुझे भी तो मज़ा दिलवा !
उसने धीर धीरे चूसना शुरू कियामुझे बहुत मज़ा आ रहा थाथोड़ी देर चुसवाने के बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गये।
माँ कसम ! चाटने-चुसवाने का ऐसा आनन्द पहले कभी नसीब नहीं हुआ मुझे !
"चोदो राजा ! चोदो मुझे जल्दी से ! आ आहरहा नहीं जा रहा है !"वो चिल्ला कर बोली।
मैंने फिर उसे सीधा किया और अपना लण्ड उसकी चूत में दे मारा।
एक जोरदार चीख के साथ- "मादरचोद मार डालेगा क्या तू?" मुझे वो बोली।
मैंने कहा," बेनचोदकह तो ऐसे रही है कि पहली बार चुदवा रही है तूतू तो बस अब जन्नत का आनन्द ले !" कहते हुए उसे ठोकना जारी रखा।
फ़चक फ़चक आहहा एयेए ऊओ ऊउ बेडरूम में यही आवाज़ आ रही थी।
वो एक बार फिर से झड़ गई पर मेरा काम जारी था। अब मेरा भी छूटने वाला थामैंने कहा- अंदर या बाहर?
'तू मादरचोद मुझे घर से निकलवाएगा क्याबाहर कर !"
मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला और उसके मम्मों और मुँह पर पिचकारी चला दी।
"यह क्या किया राजा तूने?"
मैं बोला- तूने ही तो कहा था कि बाहर कर ! मज़ा नहीं आया क्या तुझे प्रिया?
उसने शर्म से सिर झुका लिया।
"शर्म मत कर बेनचोद ! अभी तो तेरी गाण्ड भी मारनी है !"
प्रिया बोली," मादरचोद सब आज करेगा तो कल क्या करेगा?"
वाह ! वाह ! वाह ! यह सुनकर फिर से मन में लड्डू फूटे।
"चल ठीक हैतेरी गाण्ड का नंबर कल लगाऊँगा ! अभी चल बाथरूम में !"
हम दोनों बाथरूम में गएएक दूसरे को अच्छी तरह से नहलायाफिर तैयार होने के बाद वो बोली,"राजाबहुत मज़ा आया ! सच में मैं जन्नत में थी तुम्हारे साथ !"
उसने मेरे होंठों को चूमा और कहा,"अच्छा अब मैं चलती हूँ राजा !"
जैसे ही वो पलटीमैंने उसकी गाण्ड पर एक दे मारा और कहा,"जानकल तेरी बारी है !"
यह सुन कर वो शरमा कर भाग गई।
तो दोस्तोकैसे लगी आपको मेरी यह कहानी?
आपका अपना आयु राजा